जो पार्टी आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा करेगी उसको करेंगे समर्थन- जगनमोहन रेड्डी


दिवंगत नेता वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के बेटे और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगनमोहन रेड्डी राज्य में अपनी पैदल यात्रा के जरिए सड़क से सत्ता तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में जब एक साल से भी कम का वक्त आंध्र प्रदेश के चुनाव में बचा है, जगनमोहन अब तक 200 दिनों की पदयात्रा कर चुके हैं।
   
अपनी इस यात्रा के दौरान जगन ने यह स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे चाहे वो राज्य का कोई दल हो या फिर या राष्ट्रीय स्तर का। उन्होंने इंटरव्यू में श्रीनिवास राव अप्पारासु को यह बताया कि वे 2019 के चुनाव में केन्द्र में उस पार्टी या मोर्चे का समर्थन करेंगे जो लिखित तौर पर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा करेगा।


आइये देखते हैं उन्हें पूछे गए कुछ सवाल और उनके जवाब 

सवाल- आपने 200 दिनों की पदयात्रा पूरी की है। इसमें 2400 किलोमीटर का सफर तय किया है। इस दौरान आपने क्या महसूस किया?
जवाब- हर दिन मेरे लिए नया अनुभव होता है। रोज अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखता हूं। चेहरे बदल सकते हैं लेकिन लोगों की दुर्दशा हर जगह एक जैसी है। किसान परेशान हैं क्योंकि उन्हें पिछले चार वर्षों से लाभकारी कीमतें नहीं मिली है। वे लगातार ऋण के बोझ तले दबते जा रहे हैं। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।

सवाल- पदयात्रा के दौरान आपने क्या बड़ी चीज महसूस की है ?
जवाब- कई तरह की समस्याएं देखी है और ये सभी आदमी के जरिए ही पैदा किए गए हैं, इसके लिए नायडू सरकार के शासन को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने यह वादा किया था कि किसानों के सभी फसली ऋण 87,612 करोड़ रूपये तक माफ किए जाएंगे। लेकिन, पिछले चार वर्षों के दौरान उन्होंने औसतन रूप से सालाना 3,000 करोड़ रूपये ही माफ किए हैं।
वे इस नारे के साथ सत्ता में आए थे कि सभी बेरोजगार लोगों को नौकरी देंगे। लेकिन, न ही उन्होंने नौकरी दी और ना ही बेरोजगारों को भत्ता दिया गया।


सवाल- अगले चुनाव में आपकी तरफ से बड़ा मुद्दा क्या रहेगा? विशेष राज्य का दर्जा, वाईएसआर को पुनर्जीवित करना या नायडू?
जवाब- ये सारे मुद्दे एक साथ रहेंगे। पिछली बार, हम 1.5 फीसदी वोट से सत्ता में आते-आते रह गए। इसकी वजह नायडू का झूठा वादा करना, उनका ये दावा करना कि वे अनुभवी नेता हैं, पवन कल्याण फैक्टर और मोदी लहर। लेकिन, आज परिस्थितियां बिल्कुल अलग है। जनता नायडू के झूठ को जान गई है और दो पहिए पवन कल्याण और बीजेपी उनकी साइकल से अलग हैं।

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