जल संकटः शिमला ही नहीं कई शहरों में पानी को लेकर ‘त्राहिमाम’


हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला जहां पर्यटकों के लिए चर्चा में रहती थी, वह आज पूरी दुनिया में जल संकट की वजह से बदनाम हो रही है। लेकिन शिमला अकेला शहर नहीं है। देश में कई ऐसे शहर हैं जो इनसानी गलतियों से गहरे जल संकट की ओर बढ़ रहे हैं

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बेंगलुरु

- 1973 के मुकाबले शहर के आसपास 79 फीसदी जलस्रोत खत्म हुए
- 8 फीसदी के मुकाबले निर्माण क्षेत्र 77 फीसदी हुआ, 1973 से अबतक

गुरुग्राम

- 1950 के दशक में 600 के मुकाबले महज 40 तालाब अब बचे
- 40 मीटर से नीचे गया भूमिगत जलस्तर, 1974 में था छह मीटर

मुंबई

- 90 करोड़ लीटर पानी रोजाना शहर में बर्बाद हो जाता है
- 300 सेमी सालाना बारिश के बावजूद जमा करने के उपाय नहीं

दिल्ली

- 40 फीसदी यमुना का बाढ़ क्षेत्र अतिक्रमण की वजह से खत्म हुआ
- 87 फीसदी दिल्ली में अतिदोहन के कारण भूजलस्तल लगातार गिर रहा

कानपुर

- गंगा के किनारे होने के बावजूद शहर में भारी जलसंकट
- जल का अपव्यय और चमड़ा उद्योग से भूमिगत जल प्रदूषित

नैनीताल

- 2 से तीन घंटे ही कई इलाकों में जलापूर्ति की जा रही है
- नैनी झील लगातार सिकुड़ रही है, वर्षा जल के संचय की व्यवस्था नहीं

यहां भी स्थिति खराब

- 2017 में सूखे की वजह से महाराष्ट्र के लातूर में ट्रेन से पानी पहुंचानी पड़ी
- 2016 में सोलापुर के जलस्रोत को पेयजल के लिए आरक्षित किया गया था

संकट से सतर्कता बढ़ी

- मुंबई में 500 वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में बने भवन में वर्षा जल संचय अनिवार्य करने का प्रस्ताव
- चेन्नई में पहले ही बड़ी इमारतों में वर्षा का पानी जमा करने का कानून, दिल्ली में भी प्रयास

‘जीरो डे’ का खतरा

जीरो डे उन दिनों को कहा जाता है जब शहरों में जलसंकट की वजह से पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। लोगों को राशन की तर्ज पर एक निश्चित मात्रा में ही पानी का इस्तेमाल करने की इजाजत होती है।

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