हमारी बेटी से 'ईश्वर' ने बलात्कार किया था, सारी खुशियां निगल गया था वो


कई सालों से आसाराम हमारे लिए ईश्वर था, हमारी जिंदगी उनके इर्द-गिर्द ही घूमती थी। लेकिन एक दिन हमारे भगवान ने हमारी खुशियों को निगल लिया और हमारी जिदंगी बर्बाद हो गई। मेरी बेटी जब 16 साल की थी तब उसने मेरी बेटी के साथ बलात्कार किया। वो मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन था जब मेरी बेटी ने मुझे बताया कि उसके साथ बलात्कर हुआ है। मेरे तीन बच्चे हैं जिनमें से ये दूसरे नंबर की संतान है। बेटी मुझसे ज्यादा अपने पापा के करीब थी।

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'पापा आप घबराओ मत, मुझे कुछ नहीं होगा'

वो हमेशा अपनी बेटी को खुश देखना चाहते थे लेकिन इस हादसे ने उन्हें सबसे बड़ा दुख दे दिया। इस घटना के बाद मेरे पति ने फैसला किया वो आसाराम का सामना करेंगे। वो उससे मिलकर जानना चाहते थे कि उसने हमारी बेटी के साथ ऐसा क्यों किया। लेकिन हमें आसाराम से मिलने नहीं दिया गया। जब हमने आसाराम के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करवाया तो लोगों ने हमें सलाह दी की कॉम्प्रोमाइज कर लो।

लोग कहते थे कॉम्प्रोमाइज करलो, आसाराम बड़ा आदमी है। लोग हमें बोलते थे कि आसाराम के खिलाफ केस करके हम मुसीबत में पड़ जाएंगे, लेकिन हमने केस वापस लेने से मना कर दिया। मेरी बेटी ने उस दौरान उसके पापा से कहा 'पापा आप घबराओ मत, मुझे कुछ नहीं होगा'। केस रजिस्टर होने के बाद हमारी असली लड़ाई शुरू हई, और इस पूरी प्रक्रिया में मेरी बेटी की आंखों में एक बार भी आंसू नहीं आए। वो एक मजबूत स्तम्भ की तरह खड़ी रही।

आसाराम की शरण में सबसे पहले मेरे पति आए थे। उसके बाद साल 2001 में वो मुझे उनके सतसंग में ले गए जिसके बाद हम उसके भक्त हो गए। हम उसपर इतना ज्यादा यकीन करने लगे थे कि हमने अपनी बेटी और छोटे बेटे को स्कूल से निकालकर आसाराम के आश्रम ही भेज दिया। उस वक्त वो सिर्फ 11 साल की थी। उस वक्त जो भी आसाराम के खिलाफ बोलता था हम उससे संबंध तोड़ लेते थे। मेरे पति अपनी कमाई का एक हिस्सा उनके यहां दान करने लगे। उन्होंने कई मौको पर आसाराम के आश्रम में पैसे दान किए।

'वकील भी हमारी बेटी की हिम्मत देखर हैरान रह गया'

लेकिन इन सबके बाद आसाराम का असली रूप सामने आ गया, उसने हमें बदनाम करने के लिए कैंपेन चलाया, हमें मारने तक की कोशिश की। लगभग दो साल हम इस केस के लिए शाजहांपुर से जोधपुर तक सफर किया करते थे। लेकिन इन सबके बीच मेरी बेटी ने हिम्मत कभी नहीं हारी। वो उस वक्त मेरी नज़रों में हीरो बन गई जब मैंने देखा कि उसने जज के सामने बिना डरे पूरी घटना का जिक्र किया। जबकि कई बार ऐसे सवाल किए जाते थे कि मुझे गुस्सा आ जाता था। लेकिन वो निरंतर शांत रही। हमारे वकील ने मेरे पति से कहा, हमारी बेटी की हिम्मत देखकर वो भी हैरान हैं, उसने जितनी दृढ़ता से जज के सामने जवाब दिए ये देखकर हो भी हैरान हैं।

'उस दिन मेरी बेटी की आंखों में आंसू आए थे, लेकिन उसने पोंछ लिए'

सुनवाई काफी लंबी चली और इन सबके बीच मेरे बेटे ने भी अपनी पढ़ाई छोड़ दी ताकि वो हमारी मदद कर सके, और मेरी बेटी को दो साल के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी। चीजें तब खराब हो गईं जब हमें जान से मारने की धमकी मिलने लगी और केस से जुड़े गवाहों की हत्या कर दी गई। लेकिन हमारी लड़ाई उस दिन पूरी हो गई जब कोर्ट ने आसाराम को अपराधी करार दिया। जब मैंने उसे कोर्ट का फैसला बताया तो उसने खुशी से मुझे गले लगा लिया। उसकी आंखों में उस दिन आंसू आए थे लेकिन उसने फिर आंसू पोंछ लिए। उसने कुछ नहीं कहा लेकिन मैंने उसकी आंखों में वो खुशी देखी थी।

कोर्ट के इस फैसले ने मेरी बेटी को दोबारा जिंदगी दे दी। अब वो खेलती है, पढ़ती है और सिविल सर्विस के पेपर देने की तैयारी कर रही है। कभी-कभी मेरे पति खुद को इन सबके लिए जिम्मेदार मानते हैं लेकिन मेरी बेटी उन्हें समझा देती है कि वो खुद को कसूरवार ना मानें। मैं दुआ करती हूं कि हर जन्म में मैं इसी की मां बनूं।

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