बिहार: मृदुभाषी और कुशल बैंकर थे बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर आलोक चंद्रा
अरवल शहर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा के मैनेजर आलोक चंद्रा व्यवहारकुशल तथा मृदुभाषी इंसान थे। लेकिन, कड़े फैसले लेने से वे तनिक भी नहीं हिचकते थे। यही कारण है कि महज 13 माह के कार्यकाल में वे बैंक के ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए थे। ब्रांच के गार्ड रविन्द्र शर्मा बताते हैं कि साहब कभी भी देर से नहीं आते थे। वे बैंक में सबसे पहले पहुंचते थे और अन्य कर्मियों के जाने के बाद ही शाखा से निकलते थे। उन्होंने रुआंसे स्वर में कहा कि गार्ड और चतुर्थवर्गीय कर्मी से भी आदर के साथ पेश आते थे।
उन्होंने बताया कि बैंक में फालतू डेरा जमाए बैठे लोगों का उन्होंने आना-जाना बंद करा दिया था। वहीं भाजपा नेता सच्चितानंद पीयुष ने कहा कि किसी भी ग्राहक को अगर कोई समस्या रहती थी तो वे अपने चैम्बर से निकलकर उसका समाधान करने में जुट जाते थे।
सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धनाथ प्रसाद कहते हैं कि मैनेजर साहब के आने के बाद बैंक का कारोबार काफी फूल-फल रहा था। छोटे ग्राहक को भी वे तवज्जो देते थे। शाखा के एक अन्य कर्मी ने कहा कि बैंक की कार्य संस्कृति को उन्होंने काफी हद तक सुधार दिया था। लोन देने में पारदर्शिता का वे हमेशा ध्यान रखते थे।

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