दिल्ली की कड़वी सच्चाई: हर दिन होता है दो मासूम का रेप
दिल्ली में हर दिन दो मासूम दुष्कर्म की शिकार होती हैं। इस साल जनवरी से लेकर 30 अप्रैल तक की अवधि के लिए जारी दिल्ली पुलिस के आंकड़ों से यह शर्मनाक सच्चाई सामने आई है।
इस पर चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने पीड़िताओं के लिए पुनर्वास नीति की जरूरत पर जोर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यौन हमलों के पीड़ितों के लिए पुख्ता पुनर्वास नीति बननी चाहिए।
अपराध से उबर नहीं पाई-
बीते अप्रैल माह में गाजियाबाद के एक मदरसे में 10 वर्षीय बच्ची के साथ कथित रूप से दुष्कर्म हुआ था। आरोपी उसे दोस्तों से मिलाने के बहाने गाजीपुर से गाजियाबाद ले गया था। पीड़ित बच्ची के पिता का कहना है कि घटना को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन वह अब भी सहमी हुई है और घटना के बाद से घर से नहीं निकलती है।
पुनर्वास नीति बनाने की मांग-
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का कहना है कि पुलिस में संवेदनशीलता की कमी दिखती है, क्योंकि वे एक समय पर ऐसे कई मामले संभालते हैं। महिला जांचकर्ताओं की भी कमी है। कई बार तो माता-पिता घटना के लिए बच्चों को ही जिम्मेदार ठहरा देते हैं। बच्चे के लिए यह स्थिति दर्दनाक और भ्रामक है। आयोग ने पीड़िताओं के लिए पुनर्वास नीति की मांग की है।
इस पर चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने पीड़िताओं के लिए पुनर्वास नीति की जरूरत पर जोर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यौन हमलों के पीड़ितों के लिए पुख्ता पुनर्वास नीति बननी चाहिए।
अपराध से उबर नहीं पाई-
बीते अप्रैल माह में गाजियाबाद के एक मदरसे में 10 वर्षीय बच्ची के साथ कथित रूप से दुष्कर्म हुआ था। आरोपी उसे दोस्तों से मिलाने के बहाने गाजीपुर से गाजियाबाद ले गया था। पीड़ित बच्ची के पिता का कहना है कि घटना को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन वह अब भी सहमी हुई है और घटना के बाद से घर से नहीं निकलती है।
पुनर्वास नीति बनाने की मांग-
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का कहना है कि पुलिस में संवेदनशीलता की कमी दिखती है, क्योंकि वे एक समय पर ऐसे कई मामले संभालते हैं। महिला जांचकर्ताओं की भी कमी है। कई बार तो माता-पिता घटना के लिए बच्चों को ही जिम्मेदार ठहरा देते हैं। बच्चे के लिए यह स्थिति दर्दनाक और भ्रामक है। आयोग ने पीड़िताओं के लिए पुनर्वास नीति की मांग की है।

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