कर्नाटकः ये हैं भाजपा की 5 बड़ी चूक, जिसने छीन ली कर्नाटक की सत्ता


कर्नाटक का नाटक खत्म हो चुका है। शनिवार की शाम को भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया। अब बुधवार को कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन में एचडी कुमारास्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन यहां अब ये सवाल उठता है कि आखिर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी भाजपा कैसे हार गई। इसके पीछे क्या वजहें या गलतियां रही हैं। 

दरअसल मंगलवार 15 मई की शाम को जैसे ही कर्नाटक चुनाव के नतीजों की घोषणा हुई और उसके दो दिन बाद जब येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चुनाव नतीजे आने के बाद ही भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक का अध्याय (चैप्टर) खत्म हो चुका है। हम तो दो विधायकों में सरकार बनाते हैं, और आपको क्या लगता है कि क्या हम यहां 104 विधायकों में भी सरकार नहीं बना पाएंगे? अब तो अगले चुनाव पर ध्यान देने का समय आ गया है।

शनिवार की शाम को सदन में येदियुरप्पा के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद ही पार्टी के कर्नाटक मामलों को काफी निकटता से शामिल हुए भाजपा नेता ने कहा कि कुछ चीजें काम नहीं कर रही थीं। हमने कोशिश की लेकिन पर्याप्त संख्याएं जुटाने में असफल रहे।

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कर्नाटक में भाजपा की राजनीतिक सफलता मंगलवार से शुरू हो कर शनिवार आते -आते असफलता में बदल गई। यहां उन्हें चुनाव में सीटें ज्यादा मिलने के अलावा कोई सफलता नहीं मिली। भाजपा के कार्यकर्ताओं और कुछ सहयोगियों की मानें तो जो लोग चुपचाप रहते हैं वो गलतफहमी पैदा करते हैं।

पहली गलती
भाजपा नेता ने कहा कि हमारी पहली गलती ये थी कि पार्टी ने कभी सोचा नहीं था कि कांग्रेस और जेडी (एस) इतनी जल्दी एक साथ आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमने जश्न मनाना शुरू किया था। जनादेश पूरी तरह से कांग्रेस के खिलाफ था। दरअसल हम खुश थे कि जेडी (एस) वोक्कलिगा बेल्ट में अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। क्योंकि इसका मतलब था कि कांग्रेस की सीटों में कमी आएगी। हमने सोचा नहीं था कि कांग्रेस तुरंत ही एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद की पेशकश करेगी।

लेकिन गठबंधन के बावजूद, भाजपा को लगा कि सत्ता में आने के लिए यह स्वाभाविक दावा है। इस मुद्दे पर पार्टी में दो विचार दिखाई दिये। भाजपा नेता ने कहा कि 104 सीटों के साथ यह हमारी जिम्मेदारी की जनादेश का सम्मान किया जाए, और यह एक ऐसी पार्टी है जिसने सत्ता को कम नहीं किया था।

दूसरी गलती
भाजपा नेता ने कहा कि हमें लगा कि हम बड़ी आसानी से संख्या प्राप्त कर लेंगे। हम कैसे दावा नहीं कर सकते? लेकिन वहीं दूसरे नेता ने कहा कि शायद हमें कांग्रेस और जेडी एस को सरकार बनाने देना चाहिए था और लोगों को ये बताना चाहिए था कि हमें धोखा दिया गया है। यही हमारी दूसरी गलती थी।

तीसरी गलती
भाजपा को तीसरा झटका तब लगा जब येदियुरप्पा को राज्यपाल वजुभाई वाला ने सरकार बनाने के लिए निमंत्रण दिया और कांग्रेस इस पर सप्रीम कोर्ट चली गई। प्रधान न्यायाधीश ने भी इस पर फैसला लेते हुए तुरंत सुनवाई के लिए एक संवैधानिक बेंच गठित कर दी। हम फिर भी खुश थे कि चलो शपथ ग्रहण पर रोक तो नहीं लगी।

लेकिन मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत साबित करने के लिए हमें सिर्फ एक दिन का वक्त दिया। दूसरे भाजपा नेता ने कहा कि एक दिन में दूसरी तरफ से पर्याप्त विधायकों पर जीत हासिल करने के लिए एक दिन का समय पर्याप्त नहीं था, जबकि सारे विधायक बाहर पहुंचाए जा चुके थे।

चौथी गलती
भाजपा नेता के मुताबिक, हमारी चौथी गलती ये थी कि हमने कांग्रेस को कम कर आंका। हमने नहीं सोचा था कि कांग्रेस अपने विधायकों को एक साथ रखने में सक्षम होगी और उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा देगी जहां हम नहीं पहुंच सके। कांग्रेस अपने विधायकों को मनाने में कामयाब हो गई थी कि वे सरकार बनाएंगे। इस आत्मविश्वास ने उन्हें समर्थन बनाए रखने में मदद की। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में हम अक्सर इस बात पर जोर देते थे कि सरकार हम बनाएंगे।

पांचवीं गलती
बीजेपी को ये उम्मीद थी कि येदियुरप्पा ने एक बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली तो फिर वे राज्य में लिंगायत नेताओं की मदद से कांग्रेस के लिंगायत सदस्यों को बदलने के लिए राजी कर सकेंगे। जो नहीं हो सका। इस बीच, ऐसा लगता था कि बीजेपी में कोई भी जिसकी कांग्रेस में किसी से अच्छे संबंध हैं या जो कांग्रेस से बाहर निकला था वो उन्हें मना लेगा। कांग्रेस ने इन बातों की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जारी की हालांकि वो प्रमाणिक नहीं है।

यही वो कारक हैं जिनकी वजह से कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को भाजपा रोक नहीं सकी। इसके अलावा बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार बनाने का दावा, 48 घंटों के भीतर विपक्षी विधायकों को अपने पाले में करने की चुनौती और प्रोत्साहनों के बावजूद ऐसा करने में असमर्थता। भाजपा नेता ने कहा कि इन सब वजहों से हम कर्नाटक की लड़ाई हार गए।

लेकिन इसके बावजूद पार्टी को लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में हमारी जीत होगी। इस संदेश को आगे बढ़ाया जाएगा। हमें धोखा दिया गया है। लोगों की शुभकामनाएं हमारे साथ हैं। यह एक नाजुक सरकार है। हम एक बहुत मजबूत विपक्षी होंगे। दूसरा नेता ने कहा कि हमारा लक्ष्य अब लोकसभा में इनका सफाया करना है। हालांकि अभी के लिए यह एक झटका है।

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