तूतीकोरिन : हिंसा में 12 की मौत के बाद स्टरलाइट यूनिट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, शहर में धारा 144 लागू


तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में वेदांता समूह की कंपनी इकाई स्टरलाइट इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के खिलाफ महीनों से चल रहा प्रदर्शन मंगलवार को उस दौरान और हिंसक हो गया जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर दी। इस फायरिंग में 12 लोगों की मौत हो गई जबकि 60 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने प्लांट में काम होने पर रोक लगा दी।

मंगलवार को हुई गोलीबारी के चलते जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और धारा 144 लगा दी गई है। गृह मंत्रालय ने भी तमिलनाडु सरकार से इस घटना पर रिपोर्ट मांगी है। वहीं घटना पर कमल हासन ने कहा है कि हमें पता होना चाहिए कि पुलिस को फायरिंग के ऑर्डर किसने दिए थे। केवल मुआवजे का ऐलान कर देना ही इसका हल नहीं है। इंडस्ट्री बंद होनी चाहिए। लोग भी यही मांग कर रहे हैं।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के.पलानीस्वामी ने इस घटना के जांच के आदेश दे दिए हैं। मंगलवार को पलानीस्वामी ने कहा कि तूतीकोरिन में वेदांता समूह की इकाई स्टरलाइट इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में नौ प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने घटना की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी क्षेत्र में निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर कलेक्ट्रेट की तरफ जुलूस निकाल रहे थे। मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव ही नहीं किया, बल्कि उनके वाहनों और कलेक्ट्रेट में खड़े वाहनों को भी आग लगा दी। पुलिस को लोगों के जानमाल की रक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई करनी पड़ी क्योंकि प्रदर्शनकारी बार-बार हिंसा कर रहे थे और पुलिस को इस हिंसा को रोकना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे यह जानकार दुख हुआ कि इस घटना में दुर्भाग्य से नौ लोग मारे गए। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की।

पलानीस्वामी ने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के तहत एकल सदस्यीय आयोग के गठन की घोषणा की जो घटना की जांच करेगा। मुख्यमंत्री ने घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को तीन -तीन लाख और मामूली रूप से घायल लोगों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की।

5000 प्रदर्शनकारी स्थानीय चर्च के निकट एकत्र हो गए

वेदांता समूह के स्वामित्व वाले प्लांट को प्रदूषण संबंधी चिंताओं को लेकर बंद करने की मांग कर रहे लगभग पांच हजार लोग पुलिस से भिड़ गए और वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को आग लगा दी। पुलिस ने बताया कि करीब 5000 प्रदर्शनकारी स्थानीय चर्च के पास इकट्ठे  हो गए और जब उन्हें प्लांट तक मार्च करने की अनुमति नहीं दी गई तो उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट तक रैली निकालने पर जोर दिया। हालांकि एक सरकारी बयान के अनुसार जिला कलेक्ट्रेट और संयंत्र तक करीब 20 हजार लोगों ने जुलूस निकाला। इनकी मंशा प्लांट और कलेक्ट्रेट का घेराव करने की थी। ये लोग मांग कर रहे थे कि तांबा प्लांट को स्थायी रूप से बंद किया जाये। इसी दौरान हिंसा हो गई।


जयललिता ने प्लांट बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन NGT ने फैसला पलट दिया

वेदांता समूह की इकाई स्टरलाइट इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड का प्लांट तूतीकोरिन में पिछले 20 साल से चल रहा है। मार्च 2013 में प्लांट में गैस रिसाव के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता ने इसे बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद कंपनी एनजीटी में चली गई। एनजीटी ने राज्य सरकार का फैसला उलट दिया। राज्य सरकार इस पर सुप्रीम कोर्ट में चली गई और अब याचिका शीर्ष अदालत में लंबित है।

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